गुरुवार, 17 दिसंबर 2020

jaaved shah khajrana

जावेद शाह खजराना

जावेद शाह खजराना एक प्रसिद्ध पत्रकार, लेखक, कवि और फोटोग्राफर हैं। 26 रमजान हिजरी वर्ष 1398 के अनुसार 30 अगस्त 1978 बुधवार को जूनीइंदोर में जन्में जावेद शाह "एम0 मुस्लिम ऑल इंडिया शाह समाज" में इंदौर सम्भाग अध्यक्ष के पद पर कार्यरत है ।


[[उपलब्धि]]
 जावेद शाह खादिम-ए-ख़ास हज़रत नसीरुद्दीन शाह चिश्ती रह0 के वंशज हैं।  इस्लामी सूफी हजरत अब्दुल्ला शाह बियाबानी रह0 के खादिम नसीरुद्दीन चिश्ती की वंशावली के मुताबिक़ (संदर्भ: - 'शेख अब्दुल्ला शाह दाता बियाबानी' पुस्तक पृष्ठ संख्या 138) 25वी पुश्त से उनकी औलाद है। 
जावेद शाह मानपुर में स्थित हज़रत गेब शाह वली के भी वंशज हैं।
     मानपुर स्थित गेब शाह वली की मज़ार
राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता जावेद की रचनाएँ दैनिक भास्कर, नईदुनीया, प्रभातकिरण, अग्निबाण जैसे स्थानीय समाचार पत्रों में प्रकाशित होती रहती हैं।


[[ शाह समाज से सम्बंध ]]

[खजराना] स्थित हजरत नाहर शाह वली की दरगाह पर मुगल सम्राट [ शाह आलम ] द्वारा नियुक्त शाही मुजावरों इनके पूर्वज थे, वर्तमान में इंदौर संभाग में "शाह समाज के अध्यक्ष" और[ इंदौर] कांग्रेस कमेटी में शहर सचिव हैं। 

[[ बियाबानी स्थित दरग़ाह हजरत नसीरुद्दीन शाह चिश्ती रह0 की वंशावली  ]]

     मेरेे परनाना हजरत नसीरुदीीन की वंशावली

 वंंशावली में 20वी पीढ़ी पर अहमद शाह नाम लिखा है। एहमद शाह के पोते सिकंदर शाह 22वे मुजावर और दरगाह के मैनेजर थे। इन्हीं सिकंदर शाह धार वाले की बेटी फ़ातेमा मेरी दादी है।

सबसे आखरी में नूर अली शाह नाम लिखा है । नूर अली की बहन मेहरून्निसा शाह मेरे दादाजी कुर्बान अली मानपुर वालों की दूसरी पत्नी है। 


सैयद नाहर शाह वली रह0 की दरगाह -खजराना

दोस्तों मालवा प्रदेश से अल्लाह के वलीयो का रिश्ता सदियों पुराना रहा है। कौन-से वली अल्लाह सबसे पहले आए ये तो सिर्फ खुदा ही जान सकता है। 
फिलहाल मैने जो किताबें पढ़ी और दस्तावेज ख़ंगाले।
इससे जो पता चलता है ख़िदमत में हाजिर है।
  किताबों में जो दर्ज है उसके मुताबिक़ धार शहर में सबसे पहले 40 पीर तशरीफ़ लाए। उनकी शहादत के बाद राजा भोज के जमाने में सन 1010 ईसवी के आसपास शाह चंगाल रह0 आए।
  
हजरत मदार शाह रह0 के हिंदुस्तान भर में करीब 1432 चिल्ले हैं , चिल्ला उस जगह को कहते है जहाँ 40 दिन की इबादत की जाती है। इंदौर के कड़ावघाट पर हजरत मदार शाह रह0 का चिल्ला है। इसका भी इतिहास ल हवा है। हजरत एमडीआर

बुधवार, 16 दिसंबर 2020

Khwaja Gareeb Nawaz Old pictures

Old photo Of 
Khwaja Gareeb Nawaz Dargah ajmer
     Very Old real photograph Of khwaja              Gareeb Nawaz Dargah sharif ajmer                  1873
              shahjahani Gate AJMER
YE US TIME Ka photo he jab Sabse Pahle bna hua Nizami gate nhi bana tha.

              Nizami gate AJMER
               Dargaha Bazar 1913

       Mehmmodi Gate| Buland Darwaja
 ajmer First Darwaja Build By Mehmood shah khilaji Mandu .
                    Begham Dalaan 
       khwaja Gareeb nawaj entry gate
           javed shah khajrana ajmer

Khwaja Moinduddin chishti Dargah Ajmer Old photo

Khwaja Gareeb Nawaz Dargah ajmer
Old pic ___ javed Shah khajrana           javed shah khajrana 1991            javed shah khajrana 1992
            javed shah khajrana 2018
            javed shah khajrana 2019

Birthplace Of Film Actor Salman Khan

Film Actor Salman khan Born in indore 27 Desember 1965.
The bed in which Salman Khan was born in the government hospital Kalyanmal Nursing Home, Old Palasia, Indore, is also safe.
              birth place Of salman khan
       Newborn Salman Khan lived for many         days on this bed. 👍
photo And News javed shah khajrana

मंगलवार, 15 दिसंबर 2020

'गुलज़ारे अबरार' के लेखक मोहम्मद गौसी शत्तारी मांडवी

'गुलज़ारे अबरार' के लेखक मोहम्मद गौसी शत्तारी मांडववाले
✍ जावेद शाह खजराना

दोस्तों आपने
 अमीर खुसरो , फरिश्ता और अबुल फ़ज़ल जैसे दरबारी लेखकों के बारे मेें जरूर पढ़ा होगा। इन्हीं महान लेखकों फरिश्ता और अबुल फजल के दौर में ऐसी भी हस्ती गुजरी है जिन्हें बहुत कम लोग जानते हैं। ऐसे ही एक गुमनाम लेकिन अपने वक़्त के मशहूर मुसन्निफ़ (लेखक) का नाम है  हजरत मोहम्मद गौसी शत्तारी मांडवी रह0    ।
मोहम्मद गौसी शत्तारी मांडवी रह0 ने अपनी सारी जिंदगी अल्लाह के वलीयो की सोहबत में रहकर और उनके बारे में लिखते हुए गुजार दी।

 हिंदुस्तान / पाकिस्तान के करीब 612 वलियों की बेशकीमती मालूमात हमें मोहम्मद गौसी शत्तारी मांडवी रह0 द्वारा लिखे गए "गुलज़ार-ऐ-अबरार" ग्रँथ द्वारा ही मिलती है।
सल्तनत दौर में मांडव के पास नालछा गाँव में रंग-बिरंगी छपाई की प्रिंटिंग प्रेस हुआ करती थी। 
जिसमें छपी " नियामत नामा " और 'गुलज़ार-ऐ-अबरार" बेशकीमती धरोहर है।
 अफ़सोस ब्रिटिश इन धरोहरों को भी लूटकर लंदन ले गए। इसलिए भारत देश के लोग अल्लाह वलीयो की ज्यादतर मालूमात पाने से वंचित रह गए।

नालछा स्थित प्रिंटिंग प्रेस में काम आने वाला पेपर गुजरात से आता था। इसी कागज़ का व्यापार करते थे हजरत गौसी सत्तारी के वालिद हसन बिन मुसा गुजराती।

मोहम्मद गौसी बिन हसन बिन मूसा गुजराती सुम मांडवी के हालात बहुत कम मालूम है उसकी वजह ब्रिटिशों द्वारा किताबों के नुस्ख़े लूटकर लंदन ले जाना प्रमुख है।
                        गुलज़ारे अबरार
मोहम्मद गौसी शत्तारी मांडवी की पैदाइश मांडव में 11 रजब 962 हिजरी मुताबिक 1 जून 1555 शनिचर के दिन हुई। 
 हजरत कमालुद्दीन क़ुरैशी से आपने क़ुरआन शरीफ़ पढ़ा फ़िर फ़ारसी ज़ुबान की तहसील पर तवज़्ज़ो दी।
गौसी शत्तारी रह0 सिर्फ 11 बरस के थे कि आपके वालिद का साया आपके सर से उठ गया।लेकिन इन्होंने बाप की वफ़ात के बाद भी तालीम को जारी रखा। 
सिर्फ़ 17 बरस की उम्र में अजदवाजी ज़िंदगी का आगाज़ किया। इल्म नोह और इल्म अरबिया की क़िताबें हजरत शेख़ बुरहानुद्दीन कालपुरी (काल्पी) रह0 से पढ़ी।
फिर कश्फ़ , अलमनार और तलविह का दर्स हजरत सैयद शाह मोहम्मद से हासिल किया।

फिर हिजरी सन 985 में आगरा का सफ़र किया।
5 साल आगरा में रहे। हिजरी सन 990 के हिसाब से 1582 ईस्वी में ।
28 साल की उम्र में गुजरात का सफ़र किया। हजरत शेख़ वजीउद्दीन बिन नसरागा अल्वी गुजराती रह0 से अक्सर दर्सी क़िताबें पढ़ी।
बुरहानपुर में हक़ीम उस्मान बिन ईसा सिंधी से उलूमे रियाज़ी हासिल किया।
फिर हिजरी सन 994 के हिसाब से 1586 ईस्वी में वापस मांडव आ गए।
 मांडव में रहकर मांडव , धार , क़ाली बावड़ी , उज्जैन , देपालपुर , मंदसौर और मालवा के दीगर वलियों से मुलाकात करके उनकी सवाने हयात को 
गुलज़ार-ऐ-अबरार" में सिलसिलेवार पिरोया।

गुलज़ार-ऐ-अबरार" में उस वक्त के मुख़्वाजा सिलसिले के सूफिया के हालात भी दर्ज हैं।
ये बेशकीमती क़िताब हिजरी सन 998 से लेकर 1022 तक यानि 1590 ईस्वी सन से 1614 ईस्वी तक करीब 24 साल के लंबे अर्से में जब गौसी शत्तारी 60 बरस के हुए मुक़म्मल हुई।
 मुगल बादशाह अक़बर के आख़री दौर और जहाँगीर के शुरुआती शासनकाल में लिखी गई संग्रहनीय क़िताब है।

किसी जमाने में मांडव एक अजीब पुरफ़िज़ा शाही और ओलिया अल्लाह का रूहानी शहर था।
गुलज़ार-ऐ-अबरार" में हिजरी सन 700 से लेकर 1022 हिजरी तक क़रीब 422 बरसों के औलिया अल्लाह के हालात है।

हजरत गौसी सत्तारी रह0 मुस्तकीम हाल सूफ़ी थे। ओत सिलसिला सत्तारीया में शेख़ सदरुद्दीन मोहम्मद बडोदवी कुदससरा और उनके ख़लीफ़ा मेहमूद बिन जलाल गुजराती रह0 से मुसल्लिक थे। 
 गौसी सत्तारी बेमिसाल मुसन्निफ़ के साथ साथ बेहतरीन शायर भी थे।

 अहमदबाद के 'हफ्त अकलिम' में जिस मौलाना गौसी के मारूफ शख़्सियत होने और 4 अश 'आर मनकुल है।  वो यही गौसी सत्तारी रह0 है। 

संदर्भ 👇
{गुलज़ार-ऐ-अबरार" पेज नम्बर 466 ,
बुजुर्गाने दीने मालवा पेज नम्बर 102 }

Hajrat Nahar Shah Wali Dargah khajrana indore

          Hajrat Nahar Shah wali Dargah
   हजरत नाहर शाह वली की दरगाह पर मन्नत में         तोलते हुुुए

javed shah khajrana at Hajrat Nahar Shah wali Dargah khajrana
juned sultani Kawwal and javed shah khajrana 
jAved shah khajrana in Hajrat Nahar Shah wali Dargah