रविवार, 20 अक्टूबर 2013

सोनगढ़ का किला यानी सोने का खजाना

           "सोनगढ़ का किला यानी सोने का खजाना "

Songarh Fort __Mandav 
 जैसे नाम से ही ज़ाहिर है की ये कोई मामूली किला नहीं होगा क्यूँकी इस किले के नाम से ही" सोन" शब्द जुडा हुआ है सोनगढ़ यानी स्वर्ण पहाड़ !वैसे तो मांडव का इतिहास हजारों साल पुराना है और यहाँ हिंदुस्तान के कई प्रसिद्ध बादशाहों ने हुकूमत की है जैसे राजा भोज उनके ताऊ मुंज ,महमूद खिलज़ी ,नासिर शाह ,बाज बहादुर ,मुगलों और अंत में पंवारों ने ! इसके अलावा जब से भारत में इस्लाम आया तब से दिल्ली के सुल्तानों ने भी यहाँ कई बार हमले किये इल्तुतमिश से लेकर अलाउद्दीन खिलज़ी तक के हमले यहाँ होते  रहे !
जब अलाउद्दीन खिलज़ी ने यहाँ १३०० इसवी में हमला किया तो उसे यहाँ से बेशुमार दौलत और विश्व प्रसिद्द कोहिनूर हिरा भी मिला !जिस स्थान पर कोहिनूर जैसा हिरा मिला हो वो जगह खजानों से खाली कैसे हो सकती है !आज भी ये किला रहस्यमयी है 
इसी किले में वक़्त के बादशाह अपना शाही खजाना छिपाते थे ये  किला मांडव  के सबसे आखरी छोर पश्चिम दिशा में एक खड़ी पहाड़ी पर बना हुआ है यह जगह मांडू के पठार में सबसे ऊँची है इसका  आकार ऊंट की पीठ जैसा है!यह किला लाल पत्थरों से बना बहुत ही सुन्दर है और चारों तरफ से दीवारों से घिरा हुआ है इसमें प्रवेश करने के लिए एक विशाल दरवाजे से घुसना पड़ता है जिसे सोनपुर का दरवाज़ा कहते है !अगर हम मांडव  का मानचित्र देखे तो पायेंगे की ये किला बहुत ही सुरक्षित और मांडव  की आबादी से अलग--थलग है जहाँ किसी की नज़र ही नहीं जाती ! चूँकि ये पहाड़ी के सबसे आखरी छोर पर है सो इसके ठीक निचे घाटी का मनोहारी नज़ारा देखते ही बनता है  !
Map Of Songarh Fort
आज भी सोनगढ़ के किले में बकरी चराने वाले चरवाहों को सिक्के मिलते रहते है "एक अँगरेज़ इतिहासकार किनकेड " को भी यहाँ से १००८ का सिक्का मिला था इस किले के पास एक दरगाह भी है और निचे सागर !पीपल के एक पुराने पेड़ के निचे हनुमान जी की एक विचित्र मूर्ति रखी  हुई है जिसका दाहिना पैर एक बन्दर पर रखा हुआ है यहाँ पर कई खुबसूरत मार्बल की खंडित मूर्तियाँ भी बिखरी पड़ी है जो इस बात का प्रमाण है की  मांडव  वक़्त से बहुत आगे था !यहाँ पर लोहे की टोपे भी रखी  हुई है ! हुमायूँ ने जब मांडव पर हमला किया था तो गुजरात का सुल्तान बहादुर शाह गुजराती जो मांडव का सुलतान बन बैठा था घोड़ों को रस्सी से बाँधकर और खुद भी उस पर सवार होकर यही से गुजरात भागा था  !
अगली बार जब भी आप मांडव घुमने जाए तो सोनगढ़ के किले पर जाना ना भूले !
 अभी  शोभन सरकार  नामक  एक साधू  को ख्वाब  आया है की उत्तर प्रदेश उन्नाव किले में १००० तन सोना है तो मुझे भी बचपन से यही ख्वाब आ रहा है की मंडाव के सोनगढ़ किले में सोने के पहाड़ इतना सोना है जो धरती की कोख में आज भी सुरक्षित है या ज़मीन के सरकने की क्रिया में इधर--उधर हो गया है !आज नहीं तो कल इतिहास के इस रहस्य से पर्दा जरुर उठेगा की सोनगढ़ किले का नाम सोनगढ़ क्यूँ पड़ा ?
                                                                      जावेद शाह खजराना